इश्क और तर्क : एक अन्तर्द्वंद

हितेश बाबू का चेहरा लाल था। ये लालिमा क्रोध की नहीं प्रतीत हो रही थी । ऐसा लग रहा था जैसे किसी गहन चिन्ता में डूबे हुए हों । नज़रें कंप्यूटर की स्क्रीन पर ऐसे जमी हुई थी जैसे दो प्रेमी एक दूसरे को निहार रहे हों ।

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