इंद्र सभा में टीवी

 कुछ सौ साल से देवराज इंद्र दुनियादारी से एकदम अलग हो चुके थे, धरती लोक पर क्या हो रहा है उससे उनका कोई मतलब ही नहीं था क्योंकि अब वो अपना जीवन आनंद में ही बिताना चाहते थे और उन्हें पता भी चल गया था की धरती से उनके सिंहासन को कोई खतरा भी नहीं है।

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शाम ढल रही थी, देवराज सुगन्धित जल में स्नान करके अपने आसन पर विराजमान हो चुके थे और टू पीस कास्ट्यूम में अप्सराएं बाजा गांजा लेकर तैयार थीं। एक अप्सरा अपना ऊपरी वस्त्र थोड़ा ढीला रखते हुए इंद्र के हाथों में सुगंधित पुष्पों से बनी माला लपेट रही थी तब तक नारायण–नारायण की ध्वनि सुनाई पड़ती है। इंद्र असहज होने लगे क्योंकि यह नारद के आने का संकेत हो रहा था जबकि उन्होंने काफी पहले ही नारद को मना कर दिया था की वो उनके आनंद उत्सव में खलल पहुँचाने के लिए धरती का ऊल जुलूल समाचार न दिया करें क्योंकि उन्हें अब धरती से कोई इंटरेस्ट नहीं था। धरती पर जितने भी ठीक ठाक लोग थे, सारे स्वर्गवासी हो गए थे और अब उपलब्ध संसाधनों को देखते हुए इंट्री बंद हो चुकी थी इस नाते क्या समाचार लेना? तपस्वी लोग वैसे ही पैदा होना बंद हो चुके थे फिर अपना दिमाग धरती पर क्या लगाना? इस प्रोजेक्ट की जगह अब एक्स्ट्रा टेरिटोरियल स्टडी पर जोर दिया जा रहा था और अन्य ग्रहों पर ध्यान केन्द्रित किया जा रहा था, ख़ास कर ऐसी जगहें जहाँ मनुष्य अपने उपग्रह भेज कर माहौल दूषित करने की कोशिश कर रहा था।

अभी दिव्य द्रव्य महाराज इंद्र के पात्र में ढाला जा चुका था लेकिन उनके अधरों तक पहुँचा नहीं तब तक नारद आ ही गए, पात्र सिंहासन के बगल में त्रिपद पर रख दिया गया। नारद कुछ बदले बदले से लग रहे थे, उनके हाथ में वीणा भी नहीं थी और दोनों कानों में जनेऊ की डोरी से पतला कोई तंतु घुसा हुआ था और साथ ही अपने सर पर काले कांच का कोई बड़ा सा यंत्र उठाये हुए थे। नारायण–नारायण की परम्परागत ध्वनि न निकालते तो पहचान में आना भी मुश्किल था। नारद के इस रूप को देखते हुए इंद्र की सांयकालीन सभा में उपस्थित अप्सराओं को घोर आश्चर्य हुआ और इंद्र ने भी उपहास की मुद्रा में पूछा की देवर्षि यह क्या हाल बना रखा है, हमें यह भान था की आप मर्त्यलोक के मोह में फंस चुके हैं परन्तु आपकी वीणा कहाँ गयी? यह उचित कर्म नहीं है, अपने शाश्वत यंत्र को हटा कर भी आप इतने प्रसन्न क्यों लग रहे हैं और आप के कानों में यह कैसा तंतु घुसा हुआ है?

नारद हँसते हुए बोले  – देवराज, अब समय का चक्र बदल चुका है। स्वर्ग में भी धरती से कभी कभार कोई आ जाता होगा फक्कड़ जैसा इस नाते नीचे हो रहे परिवर्तनों से आप अनभिज्ञ हैं। मेरे कानों में इलेक्ट्रोनिक तंतु हैं, धरती लोक का बहुत बड़ा आविष्कार, ये मेरे आई पैड से जुड़े हुए हैं जिसमें मैं अनगिनत संगीत का भंडार रखे हुए हूँ, विविध प्रकार के। ऐसे ऐसे वाद्य यंत्र जिसकी देवता कल्पना भी नहीं कर सकते, बस अपनी ऊँगली की सहायता से जो चाहूँ वह सुन सकता हूँ। साथ ही धरती पर अपनी वीणा साथ लेकर कहाँ घूमता फिरता, बदलते समय के साथ उसे देख कर लोग मुझे भिक्षु समझने लगे थे और अपनी मुद्राएँ दया के भाव से देने लगे थे।

इंद्र – और कांच क्यों उठा लाये? इसकी यहाँ क्या आवश्यकता?

नारद – महाराज इसे टेलीविजन कहते हैं, इसकी सहायता से धरती के प्राणी अपने शयनकक्ष से ही हजारों मील दूर का समाचार ले सकता है। वह भी अपनी इच्छा के अनुसार जब चाहे तब केवल इसे अबाध विद्युत् की आपूर्ति होती रहे, उस पर यह तो इनबिल्ट डीटीएच वाला है, बस रिचार्ज कराना पड़ता है।

इंद्र – यह आपके शब्दकोष को क्या हो गया है? आप कुछ ऐसा बोल रहे हैं जो देवलोक में किसी ने कभी सुना नहीं होगा न ही किसी ग्रन्थ में उसका वर्णन मिलता है।

नारद – देखिये प्रभु, जहाँ रहना होता है वहां की भाषा आत्मसात करनी ही पड़ती है इस नाते मेरा शब्दकोष कुछ और समृद्ध हो चुका है क्योंकि अब देववाणी तो भारतखंड में कहीं सामान्य व्यवहार में है नहीं, अपनी जो भाषा थी उसमें भी समय उन लोगों ने राज्यों की भाषाओँ को स्थान दे दिया है, विशेषकर आंग्ल भाषा जो हैवेन में बोली जाती है। याद ही होगा आपको की एक दिन सेंट पीटर आपसे मिलने आये थे तो कैसी भाषा का प्रयोग कर रहे थे, उनकी भाषा का प्रकोप बहुत व्यापक हो चुका है।

इंद्र –ठीक है,आसन ग्रहण करिए और यह बतलाइये की इस टेलीविजन का यहाँ क्या उपयोग?आपने यहाँ के नियम तोड़े हैं, आपको तो पता ही होगा की नीचे से कोई भी वस्तु यहाँ लाना प्रतिबंधित है। द्वारपालों ने रोका नहीं आपको?

नारद – हाँ, गार्ड कुछ तकझक कर रहे थे तो उनको मैंने कुछ संगीत सुनाया और टेलीविजन में अप्सराओं का थोड़ा सा नृत्य दिखला दिया फिर पार हो गया, वैसे भी उनको पता है की मैं आपका प्रिय हूँ, मुझसे वैर रखकर उन्हें अपना कार्यक्षेत्र बदलवाना थोड़े ही है।

इंद्र – क्या इस यंत्र में अप्सराएँ नृत्य भी करती हैं?

नारद – हाँ महाराज, लेकिन वो उसमें से निकल कर आपका आलिंगन करने नहीं आ सकतीं क्योंकि वो यहाँ से बहुत दूर कहीं होती हैं और सूक्ष्म तरंगों से माध्यम से हाथ में लिए हुए रिमोट यानी सुदूर संवेदी नियंत्रक से उनको इस यंत्र में निमंत्रित करना होता है।

इंद्र के अगल बगल खड़ी अप्सराएं भी अब इस यंत्र की तरफ ही ध्यान केन्द्रित कर चुकी थीं और इंद्र ने आदेश दिया की धरती के इस यंत्र का प्रदर्शन किया जाय। नारद ने ताली बजाई और पीठ पर बड़ा सा बॉक्स लादे एक सेवक आया, नारद ने बक्से में से बैटरी निकाली और उससे टेलीविजन को कनेक्ट किया। अत्यंत झीने और अल्प वस्त्रों में एक युवती समुद्र तट पर कामुक भाव भंगिमा से परिपूर्ण अठखेलियाँ कर रही थी और कह रही थी की सुबह मन करता है, शाम को करता है, बार–बार करता है। देवलोक की अप्सराएं इस दृश्य को आँखें फाड़ कर आश्चर्य के साथ देख रही थीं। बैटरी लाने वाला सेवक अपनी जांघों के बीच दोनों हाथ रखते हुए अभिवादन करके निकल लेता है। इंद्र ने आखें भींचते हुए नारद से तेज आवाज में कहा की यह कैसा समाचार है? धरती पर ऐसा ही समाचार देखा जाता है?

नारद – महाराज यह समाचार के बीच में आता है, दर्शकों को प्रेरित करने के लिए और उनकी उत्सुकता बनाए रखने के लिए। यह अत्यंत ही अल्पकाल के लिए होता है, इसके दर्शन के उपरान्त समाचार मिलेगा।

इंद्र – परन्तु देवर्षि आप कह रहे हैं की यह यंत्र प्रायः प्रत्येक मनुष्य के घर में है तो क्या परिवार के सभी लोग इस युवती का दर्शन करते हैं?

नारद (मन में सोचते हुए की अभी डियो और अंडरवीयर का तो आया ही नहीं) –  हाँ देव सभी लोग सपरिवार दर्शन करते हैं और आनंदित होते हैं, क्या बच्चे क्या वृद्ध। परन्तु लोग इसके लिए टेलीविजन नहीं रखते, उसपर अन्य रोचक सूचनाएं एवं समाचार मिलते हैं।

तब तक टीवी पर विज्ञापन समाप्त हो चुका था और समाचार शुरू हो गए थे। पहला समाचार था बिहार का दंगल। इंद्र ने पूछा की वो युवती चली गयी तो नारद ने कहा की लगातार देखते रहना होता है, वह बीच बीच में आती रहती है। अभी देखिये आर्याव्रत के बिहार राज्य में चुनाव हो रहे हैं, जनता को अपने शासक का चयन करना है। वहां अत्यंत ही रोचक उत्सव होता है इस अवसर पर और काफी दिनों तक चलता है, जनता का मनोरंजन भी भरपूर होता है और लोग इसमें पूरी तल्लीनता के साथ लगते हैं। इस बार का उत्सव विलक्षण है क्योंकि बहुत कुछ दांव पर लगा है एवं प्रतिदिन कोई रोचक मोड़ आ रहा है। दर्शक एवं प्रतिभागी भी भ्रमित एवं चकित रहते हुए भी उत्साह बनाए हुए हैं। समाचार में अत्यंत रूपवती युवती बता रही थी मांझी मान गए हैं और एनडीए में सीटों के बंटवारे पर सहमति बन गयी है, वहीं अभी तक राहुल गांधी के लालू यादव के साथ मंच साझा करने के बारे में संशय की स्थिति बनी हुई है। इंद्र ने पूछा की यह कौन सी प्रक्रिया है चयन की तो नारद ने उनको लोकतंत्र और इस प्रक्रिया के बारे में बड़ा सा लेक्चर दिया जिसे सुन कर इंद्र कुछ बेचैन दिखे और धीरे से नारद के कान में बोले की इस प्रकार के समाचार इंद्र के अतिरिक्त देवलोक के किसी अन्य देव को न दिखाए जाएँ और टेलीविजन इंद्र के कक्ष में स्थापित कर दिया जाय ताकि लोकतंत्र के बारे में किसी को यहाँ पता भी न चले।आदेश का पालन हुआ और टीवी इंद्र के शयन कक्ष में चला गया। इंद्र ने अप्सराओं से कहा की आज की सभा स्थगित की जाती है और वो लोग जाकर विश्राम करें। अप्सराओं में खुसर फुसर होने लगी की ऐसा तो सैकड़ों वर्ष पहले युद्ध की स्थिति में होता था, नारद ने न जाने कौन सा यंत्र ला दिया की देवराज मुग्ध हो गए। एक अप्सरा ने कहा की हो सकता है कक्ष में यंत्र को स्थापित करके देवराज धरती की कन्या का आह्वाहन करें लेकिन यह हम लोगों के रहते संभव नहीं हो पायेगा। फिर भी समस्या बढ़ तो गयी ही है क्योंकि हम लोग दरबार में अपनी नियमित प्रस्तुति नहीं देंगे तो करेंगे क्या? हमारा प्रशिक्षण ही इसी कार्य के लिए हुआ है। बैटरी लेकर अन्दर जा रहे नारद ने धीरे से कहा की आपलोगों को अपना जॉब प्रोफाइल बदलना पड़ेगा।

टीवी एडजस्ट कर दिया गया और फिर ऑन हुआ एक युवक नग्न अवस्था में औंधा पड़ा हुआ है केवल अंतर्वस्त्र पहने और उसके शरीर पर अनगिनत स्त्री अधरों से पड़े चुम्बन के चिन्ह दिख रहे हैं, इंद्र असहज होने लगे और नारद से बोले – यह कैसा समाचार है? इस युवक की ऐसी दशा कैसे हुई? कहीं कामांध युवतियों ने इसका अपहरण तो नहीं कर लिया? इतने गाढ़े चिन्ह? अवश्य ही युवतियां रक्तपिपासु रही होंगी, धरती पर अब ऐसा भी होने लगा है?

नारद – अरे मेरे भोले देव, यह रक्त चिन्ह नहीं हैं, युवतियां स्वयं आकर्षक दिखलाने के लिए अपने अधरों पर एक विशिष्ट पदार्थ का लेप लगाती हैं जिसको लिपस्टिक कहते हैं। यह उसी के चिन्ह हैं और यह चमत्कार हुआ है युवक के अंडरवीयर यानी अंतर्वस्त्र के चलते, जिसे देख कर युवतियां उसके ऊपर अपने स्नेह की बौछार कर देती हैं। यह भी समाचार नहीं है, समाचार इसके बाद आता है।

इंद्र – तो क्या वहां युवक अपने अंतर्वस्त्र ऐसे ही प्रदर्शित करते रहते हैं? इसी के चलते आजकल उधर से लोगों का इधर आना ही बंद हो गया है।

नारद – नहीं महाराज, अभी भी वहां अधिकांश जनता केवल फटे अंतर्वस्त्र ही धारण करती है लेकिन इस यंत्र में आने वाले लोगों की दुनिया दूसरी है जिनका दर्शन करते हुए जनता को अपने फटे अंतर्वस्त्रों का ध्यान नहीं रहता और भ्रमित लोग कुछ काल के लिए खुश हो ले लेते हैं।

इंद्र – परन्तु देवर्षि घरों में सब लोग इसको एक साथ कैसे देखते होंगे, मस्तिष्क दूषित नहीं होता? बाल एवं किशोर मन पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता?

नारद – समय बदल रहा है महाराज। अब लोग बहुत तेजी से छलांग लगा रहे हैं और सोचने समझने का बहुत बड़ा हिस्सा टेलीविजन के लिए छोड़ दिया गया है जिसके माध्यम से व्यापारी वर्ग अपनी समझ को जनता की समझ के ऊपर ठोंकता जा रहा है। देखिये किस युवक की चाहत नहीं होगी की उसे युवतियों का चुम्बन मिले और अगर ऐसे अंतर्वस्त्र पहनने से उसे कुछ अच्छा आभास होता है तो वह भी इस इन्तजार में रहता है की एक दिन वह भी अपने कपड़े फाड़ कर अन्दर वाला दिखलायेगा और उसके ऊपर भी बौछार होगी। महाराज ऐसे– ऐसे सुगंधित द्रव्य आ गए हैं की उनका छिड़काव करते ही युवतियां पुरुषों के ऊपर गिरने लगती हैं, उनके यंत्र चालित वाहनों के रंग और चक्के की घिसावट तथा कलाबाजी देख कर युवतियां लिपट जाती हैं। नाना प्रकार के उत्पाद आ गए हैं जिनसे लोगों की कामेच्छा बढ़ जाती है और बनी रहे इसके लिए केसर और शिलाजीत मिश्रित तम्बाकू भी है, च्यवनप्राश भी है।

इंद्र – लेकिन वैद्य राज तो बता रहे थे की तम्बाकू से पुरुष नपुंसक हो सकता है, उसकी स्तम्भन शक्ति होती है।

नारद – नहीं महाराज, इस यंत्र में समाचारों के बीच बीच में दिखाता है की गुटका खाने से मर्दानगी एवं राजशी वैभव प्राप्त होता है, गुटका यानी एक छोटी थैली में ताम्बूल की सम्पूर्ण सामग्री जिसे व्यापारी पान मसाला कहते हैं। आजकल कामेच्छा को बढ़ाने वाले विज्ञापनों के बाद पान मसाले का ही विज्ञापन अधिक आता है।

इंद्र – और दिखाओ, और दिखाओ। केवल वर्णन करके मुझे चकित न करो।

नारद – इसमें दर्शकों की इच्छा के अनुरूप कार्यक्रम नहीं आते महाराज जबकि देखने का भुगतान करना होता है। यह भी धरती लोक का आश्चर्य ही है।

इंद्र – परन्तु देवर्षि सबसे पहले जो युवती आई थी उसका क्या करने का मन कर रहा था और वह किस वस्तु के लिए दर्शकों को निमंत्रित कर रही थी?

नारद – आप वही रह गए? वह धरती के एक चमत्कारी आविष्कार का विज्ञापन कर रही थी जिसके धारण करने से कामांध युगल गर्भ की संभावना को समाप्त कर देते हैं और चरम आनंद को प्राप्त होते हुए भी संतति पर नियंत्रण रखते हैं।

इंद्र – शिव शिव ! यह क्या हो रहा है धरती पर?आप लोगों ने कुछ किया क्यों नहीं?

नारद – अब बात बहुत आगे निकल गयी है, किसी का नियंत्रण नहीं हो सकता। मनुष्य को स्वयं ही इसका समाधान खोजना होगा। महाराज आज के लिए इतना ही, अब कल फिर देखा जाएगा टेलीविजन अन्यथा आपका भ्रम बढ़ता जाएगा जिससे देवलोक के अन्य कार्यक्रम बाधित होने लगेंगे। आज्ञा दीजिये, मैं कल पुनः उपस्थित होता हूँ और हाँ यह रिमोट साथ ले जा रहा हूँ ताकि आप कुछ और देख कर चिंतन करते हुए अपनी निद्रा न बाधित कर लें। नारायण नारायण।

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