बनारस से भी बुलेट ट्रेन

अपनी चाय की भट्ठी पर कल्लू आंच टाईट कर रहे थे लेकिन रात की हल्की बारिश का असर कोयले पर भी था और माहौल में धुआं फैल रहा था। सड़क पर चलते फिरते ग्राहकों से पहले वो लोग जुटने लगे थे जो गंगा नहाने और मज्जिद जाने जैसा पवित्र काम सबेरे-सबेरे इस दुकान पर भी आना मानते हैं क्योंकि यहाँ अखबार आता है जो एकदम सबेरे तो सलामत रहता है लेकिन थोड़ी सी भी देरी होने पर उसके पन्ने बिखर जाते हैं और फिर वह बन जाता है देश का सर्वाधिक पढ़ा जाने वाला अखबार।


अखबार में आज पहले पन्ने पर ही ऐसी खबर दिखी जो चर्चा का केंद्र बन गई। सजीवन तिवारी ने अखबार उठाते हुए पूछा – का कल्लू आज भट्ठी देर से लगाए का? लग रहा है कि रात हवा बढ़िया चलती रही और सबेरे तक सुतले रह गए। कल्लू हाथ का पंखा भट्ठी के मुहाने पर तेजी से हौंकते हुए बोला- न पंडीजी, कोयलवा तनिक भींज गवा है जवना चलते दुई घंटा होई गवा, लहकी नहीं रहा है। तिवारी हंसने लगे और अगल बगल के लोगों को भी तेज आवाज में सुनाते हुए बोले- ‘कहां देश में सलिंडर फीरी बांट रहे हैं मोदी जी अउर इ ससुर दुई घंटा से कोइला सुलगा रहे हैं। चूतिया कहीं क, अइसेही बिकास होगा रे? मान लो इहाँ तो सब अस्थिर हैं, कवनो जल्दी नहीं है लेकिन अगर किसी को शहर जाना रहे और सोचे की कल्लू की दोकान से चाय पीकर निकलेंगे त उसका तो दिन बन गया न?’ दुकान की छाजन में लगे बांस से साइकिल टिकाते हुए पहलवान बोले- ‘का तेवारी अब सब केहू घर से चाह पीकर निकलता है, कल्लू के भरोसे सब थोड़े न रहता है लेकिन ई बताओ की जे सिलंडरवा बंट रहा है सुना है ओकरा पइसा भी घुमाफिरा के वसूल करना है?’

तेवारी- ‘अरे यार ऊ सब तो हम नाहीं जानते, ऊ बात तो हम एह लिए कह दिए कि ई दुई घंटा से भट्ठी सुलगा रहे हैं और आजकल त इतना देर में ज़माना कहाँ से कहाँ चला जाता है। इहाँ न एतनी शांति से पड़े हो, जाकर देखो दिल्ली बम्मई। लगता है कि सब भगे जा रहे हैं अउर तनिको रुक गए त हाटे फेल हो जायेगा, उंहा तो कोई तुमको रुक कर रस्ता भी नहीं बता पायेगा।’

पहलवान- ‘अरे भाई दिल्ली बम्मई सब लोग कमाने जाता है, रुक कर रास्ता बताना रहता तो अपने गांवे में नहीं रहता शांति से? बताते हैं कि उंहा तनिको लेट हो गया तो काम का भारु नुकसान होई जाता है तो उहाँ के हाल में अउर अपने गाँव के हाल में बनारस से कलकत्ता का फरक है भाई।’

तब तक तेवारी के हाथ से अखबार लेकर भुलेटन पढ़ने लगे थे और एकाएक बाह बाह करने लगे। अभी इस ठीहे पर वही पहले आदमी थे जिसने अखबार पढ़ा। भट्ठी दहकाने की कोशिश कर रहे कल्लू के भी हाथ रुक गए और उसी ने उत्सुकतावश पूछा- गुरु कवनो फायदे देवे वाली खबर है का? काहें ले एतना चिहा रहे हो? का खबर है?

भुलेटन- अरे चच्चा अखबार बता रहा है कि अब बनारस से डिल्ली तीन घंटा से भी कम टाइम लगेगा, अभिन तो ससुर दुई घंटा टिकट कटाने की लाइन में लग जाता है।

तेवारी- लेयो सुनो पहलवान तोरे अखिलेश यादव बनारस में मेट्रोल चलावे की बात किये त मोदी बनारस से डिल्ली बुलेट ट्रेन निकाल दिए, हम कहते हैं न कि मोदी जी दुई हाथ आगे ही रहेंगे।

पहलवान- फेंके में न? अरे तनी पढ़ो त केतना टाइम में चलेगा बुलेट ट्रेन? अगर जल्दी चल जाता त हम हर अतवार मंडी से सब तरकारी खरीदते अउर डिल्ली चहुंपा कर रात ले भी घर लउट आते। कल्हिए नन्हका कह रहा था कि ओकरे हिंया टमाटर साठ रुपया किलो मिल रहा है। एक बार हमहूँ ओकरे हिंया गए रहे, कहे के तो बड़का इंजीयर बन गया है लेकिन खाना पीना सब दल्लिद्दर जैसा है। एकदम बेस्वाद खाना, हमको घर से दाल लाने को भी मना कर दिया और कह रहा था कि हिंया टाटा कंपनी का बढ़िया दाल मिलती है। झकझक पन्नी में एकदम बीन बना कर टनाटन।

तेवारी- टाटा दालो बनाता है का हो ? हम त समझे की खाली गाडिये बनाता है। बताओ उहो सब ई कुल धंधा करेगा? हमरा खेत नील गाय खाए चाहे बंजर रहे किसी को का मतबल।

कल्लू- अरे चाय ले लो लोग अपना-अपना। कहो चच्चा जब टाटा दालो बेचने लगा दिल्ली में तो उसका ट्रक तो पूरे देश में चलता है,  हर जगह माल पहुंचा देगा फिर त अपने बजार में साव जी का धंधा भी कुछे दिन में खतम समझो।

तेवारी- अरे ऊ चलता रहेगा, टाटा उधारी थोड़े न देगा कि अभी ले जाओ, इत्मिनान से देते रहना।

पहलवान- काहें नहीं उधारी देगा? जब टरक अउर मैजिक तक दे देता है की ले जाओ ,पइसा देते रहना तब दाल काहें नहीं देगा?

तेवारी- अरे पहिले ई त पढ़ो भुलेटन कि कब बुलेट ट्रेन चालू होगा?

कल्लू- जब तलक बनारस ऊ का बन जाएगा जे मोदी जी कहते रहे? का था कयोटो।

भुलेटन- चच्चा लिखा है कि पचीस साल लगेगा बनारस से बुलेट ट्रेन चलने में काहें से कि उसके पहिले दूसरा रूट पर चलाना है, गुजरात से बम्मई साइड का। लेकिन एक बात बहुत अच्छा लिखा है कि बनारस वाली बुलेट ट्रेन सस्ता पड़ेगी सरकार को जबकि दूरी इसी रूट की अधिक है।

पहलवान- कइसे रे? पहिलकी की पटरिया उखाड़ के इधर लगा देंगे? लेकिन हमको मोदी पर भरोसा नहीं काहें से कि मिंया लोग को भगाए नहीं अभी तलक जबकि गुरु जी कहते रहे की सरकार बनते ही सब मुसलमान देश छोड़ कर भाग जायेंगे, देख लेओ अब तो आधा टाइम तो होई गवा।

तेवारी- चुप चुप, मुमताज मिंया आ रहे हैं।

मुमताज- अरे का खबर है पहलवान, आज आपके कवनो साधू फादू कुछ बोले की नहीं मिंया लोगों को, आदित नाथ का कवनो बयान छापा है?

पहलवान- देखो अब उमर हो गयी है, हमरे चच्चा के साथे अखाड़ा लड़ते रहे न? फिर सबेरे-सबेरे ई का लवंडई वाली बात कर रहे हो? लड़का बच्चा सब बियाह दिए लेकिन बात वही करोगे, कम से कम रोजा में त जबान शुद्ध रखा करो।

तेवारी- अरे मिंया पहलवान मोदी जी से नाराज हैं काहें से की ऊ तुम लोगन को देश से भगाया नहीं, खाली झुट्ठे भौकाल बनाते रहे।

मुमताज- अरे ई देश केहू के बाप का है की भगा देगा? हम अखबार पढ़ने आये हैं और आप लोग ई का पढ़ा रहे हैं ?

तेवारी- शुरू कौन किया? तुमही न पूछ रहे थे कि कवनो बयान सुनाओ? संतोष त तुमको भी नहीं है। रात भार खाते हो सबेरे सोते काहें नहीं हो? अखबार पढ़ने का चले आते हो? का इहाँ कथा चल रही है की तनी तुमहूँ सुन लो?

भुलेटन- अरे खबर है न चच्चा, बस दुई घंटा में बनारस से दिल्ली वाला बुलेट ट्रेन चलेगा लेकिन अभिन पचीस साल लग जायेगा।

मुमताज- बेटा तब तक पता नहीं हम लोग रहेंगे भी की नहीं अउर रहेंगे तो भी टांग के कब्रिस्तान ले जाने की तैयारी करेगा लोग की दुई घंटा में दिल्ली देखायेगा। लेकिन ई बताओ भाड़ा केतना बताया है?

तेवारी- अरे अभी चलबे नहीं किया तो पहिले ही भाड़ा बता देगा, गाड़ी आएगा, उसका पटरी अलग होगा, सवारी जुटेगा तब न भाड़ा बनेगा? लेकिन ई बताओ पहलवान त कह रहे हैं कि ई दिल्ली अपने लड़का के हिंया तरकारी हर हफ्ता चहुंपा देंगे, बाकी आदमी दिल्ली एतना जल्दी जाकर का करेगा?

मुमताज- अरे आदमी खरीदारी करे जायेगा, जाम मज्जिद चला जाएगा, लाल किल्ला देख लेगा? लेकिन यार तब बनारस में नयी सड़क वाली बजार बंद हो जायेगी काहें से की जहाँ से ऊ सब माल लाता है उंहा बनारस से केहू भी दुई घंटा में पहुँच जाएगा। जबकि अभी खुदे नयी सड़क जाने में तीन घंटा लग जाता है।

पहलवान- अरे बनारस भी तो अखिलेश सुधारे रहे हैं, मेट्रोल चलेगा त सांय सांय आदमी इधर से उधर जायेगा।

मुमताज- अरे मेट्रोल न हो, मेटरो, ऊ दिल्ली में है बहुत बढ़िया गाड़ी होता है। उसमें न बीड़ी पी सकते हो न ही पान खा सकते हो, खैनी थूकने का भी इंतजाम नहीं होता है। बुलेट ट्रेन का बनावट उससे भी बढ़िया होता है, नन्हे एक बार फोटो देखा रहे थे।

तेवारी- अरे चले त सही, दुई घंटा तो हम रच के सुरती रगड़ देंगे। बनारस में रगड़ना चालू करेंगे और रगड़ते-रगड़ते दिल्ली तक पहुँच जायेंगे जब पहलवान जायेंगे अपने लड़का के पास तरकारी पहुंचाने।

कल्लू- ए भैया अब आप लोग अगला टेसन देखो, इधर अब ग्राहक लोगों का टाइम हो रहा है। ई सब बड़े लोगों का बड़ा-बड़ा बात है। हमको नहीं समझ में आ रहा है, चीनी का दाम बढ़ गया है और अठन्नी भी बंद हो गयी है त आज से हम भी एक रुपया बढ़ा दिया हूँ चाय में। आप लोग आज पुराना वाला रेट ही दे देवो लेकिन चुपचाप, कोई देखे नहीं।

कल्लू का भुगतान करके सब आगे बढ़ चले तभी वकील साहब मिल गए जो शहर जा रहे थे, तेवारी ने पूछा कि इतनी जल्दी क्यों तो उन्होंने कहा की बहुत काम है, आज सीनियर ने चेंबर में जल्दी बुलाया है। किसी ने आरटीआई डाल कर पता कर लिया है कि नगर निगम के पास ऐसी कोई फ़ाइल नहीं है जिससे पता चले की क्योटो नगर पालिका के साथ बनारस नगर निगम का कोई समझौता हुआ है।

चूँकि सीनियर साहब पार्टी के अधिवक्ता प्रकोष्ठ के नेता भी हैं तो एक प्लान बन रहा है कि जिसने राष्ट्रविरोधी आरटीआई डाली है उसी को किसी मुक़दमे में फंसा कर चित्त कर दिया जाए क्योंकि बेटा चले हैं बिकास के रस्ते में टांग भिड़ाने।

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  • Sunil Pandey

    ठेठ बनारसी और आम जन जीवन को समेटे कमाल का लेख

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