ब्रेकिंग न्यूज़ : योगी पपीता खाते हैं

टीवी में बता रहा था रात की जोगी जी पपीता खाते हैं। पपीता पेट के लिए बहुत बढ़िया रहता है। पेट साफ़ रहे त दिन सही गुजरता है, लेकिन अखिलेश यादव की बात अलग थी। छोटका अपने लैपटॉप में देखाया रहा उनका एक विज्ञापन जेम्मे ऊ परिवार के साथ भर टेबुल नाश्ता मार रहे थे। लड़का –लड़की साथ बइठे रहे। डिम्पल परोसती रहीं। मुखमंत्री निवास में एक रौनक रही।

पूर्वी उत्तर प्रदेश में एक कसबे की सुबह। दिल्ली के जागने से पहले चाय के झोपड़े में चूल्हे से उठता धुआं और सबसे पहले अखबार पढ़ने के लिए वहां नियमित जुटने वाले कुछ लोग।

hindi-samachar

तिवारीः अरे करीमन, इधर दो अखबार। तनिक हमहूँ देखें की नयी खबर का है। रात बिजली गोल हो गयी रही त टीवी नहीं देख पाए। अभिन सबेरे वाली गाड़ी से नन्हे आये हैं और अपने बाबा को समझा रहे थे की सबेरे कुल्ला करके पपीता खाया करिए टाईट रहेंगे। बोलेन की टीवी में बता रहा था जोगी आदित नाथ जी सबेरे पपीता खाते हैं। देखिये कितना टाइट हैं।

बुल्लूः लेकिन चचा जोगी जी की उमिर कम है। रहुलो गाँधी से एक साल छोटा हैं। ऊ चाहे जो खाएं, लेकिन बाबा खाली पेट पपीता खाने लगेंगे त धोती खराब कर देंगे। सुनते हैं की पपीता पेट साफ़ करता है,.लेकिन जोगी जी खाली पेट पपीता खाते हैं सबेरे-सबेरे ?

करीमनः नाहीं चचा। उसीना हुआ चना भी खात हैं, चाहे दलिया खात हैं फिर माठा पियत हैं, अखबार में लिखा है।

तिवारीः अरे, त दलीया तो दूध में बनता है न फिर ऊ दूध खा के माठा पियत हैं ?

बुल्लूः नमकीन दलिया भी बनता है चचा। दाल –तरकारी सब डाल के। बड़ा मस्त लगता है। शहर में डाक्टर लोग मरीज को खाने के लिए कहता है। मास्टर भी वही खात हैं, काहें से की ओनका सुगर है।

तिवारीः देओ करीमन अखबार देखें त की नमकीन वाला खाते हैं की मीठा वाला ? रोज माठा पीते हैं त नमकीने वाला खाते होंगे न ?

करीमनः अरे चचा ऊ छोड़ो। छपा है की कई शहर में अब गोश क दुकान सब बंद हो रहा है। कई जगह लोगन को खाने में दिक्कत हो रहा है। उहाँ काम करे वाला लोग छाती पीट रहा है।

बुल्लूः अरे का दिक्कत है और केतना लोग काम करता है ? इहाँ कल्लन तो खुदे हलाली करके खलिया के बोटियाता है। केतना लोग उहाँ काम करता है?

करीमनः अरे तुम्हरी बुढ़िया भइंसिया और ओकर बचवा जब कल्लन बिकवाये रहे त का भइंस गंगा नहाए गयी ? कटे ही गयी न ? भुला गए पुराना ज़माना जब केहू का जानवर मर जाता रहा और नदी के तीरे हम लोग पहुंचा आते थे, त जहाँ अब अम्बेडर बाबा की मूर्ती लगा है ऊ बस्ती वाले थरिया लेकर दौड़ पड़ते थे ? का करने ? ऊ देखो मोलवी साहब आय रहे हैं। ऊ अधिक जानकारी देंगे। आदाबर्जे मोलवी साहब, का हाल है ?

2

मौलवी साहबः उहे चमड़ी-उहे खाल है। तू बताओ का हाल ? टीवी में बता रहा था रात की जोगी जी पपीता खाते हैं। पपीता पेट के लिए बहुत बढ़िया रहता है। पेट साफ़ रहे त दिन सही गुजरता है, लेकिन अखिलेश यादव की बात अलग थी। छोटका अपने लैपटॉप में देखाया रहा उनका एक विज्ञापन जेम्मे ऊ परिवार के साथ भर टेबुल नाश्ता मार रहे थे। लड़का –लड़की साथ बइठे रहे। डिम्पल परोसती रहीं। मुखमंत्री निवास में एक रौनक रही। अब त टिविया में देखा रहा है की जोगी जी अपना तखत भी मंगवा रहे हैं, ओही पर सुतिहें। अच्छा है लेकिन ऊ रौनक नहीं रही।

तिवारीः मोलवी साहब, अब तो आय गए हैं। तख्ते पर सोयें भा चटाई पर बाकी ई कहो की आप लोगन को बर्दाश्त नहीं हो पा रहा है। काहें डरते हैं भाई ? ऊ अब एक पार्टी नहीं हैं, सबके मुख्यमंत्री हैं।

मौलवी साहबः देखा है, सबके मुखमंत्री। ससुर उर्दू टीचर में भी अइसा-अइसा लोग भर्ती हो गए रहे जेनको अपना नाम लिखना भी नहीं आता। बनते रहे रफीक उल मुल्क के बेटवा बाकी अंधेर तो कर ही दिए थे। ओही का सजा मिला। अब जोगी सबको ठीक करेगा।

तिवारीः अरे त उर्दू का कापी आप ही की बिरादरी के लोग न दाम लेकर लिखे होंगे, जिनको उर्दू आता रहा होगा, इसमें अखिलेश यादव का क्या दोष ?

करीमनः समझे में नहीं आ रहा है की आप दोनों में से कौन किस पार्टी का है, पारी-पारा आप लोग पार्टी बदल रहे हैं। देखिये जोगी जी के लिए गाय भी मुख्यमंत्री निवास में आएगी।

तिवारीः ई तो अच्छी बात है, गौ सेवा तो धरम है।

मौलवी साहबः धरम है तो कितनी गाय रखे हैं पंडी जी ? हमरे इहाँ तो तीन ठे गऊ हैं, सेवा भी हमेशा होती है और दूध भी हमेशा।

तिवारीः आप जइसे आसामी हम नहीं हैं न। हम तो पिछले साल ही निकाल दिए। खली वली छोड़िये, भूंसा इतना महंगा हो गया है की अब फायदा नहीं है। ऊपर से अब कौन करे गऊ की उतनी सेवा। घर में दूध चाहिए सबको और भोसड़ी वाले सेवा करना कौनो नहीं चाहते। घर की जरूरत के हिसाब से बालटा वाले को लगा लो आराम है। बच्चा लोगों को मिल जाये और चाय का काम चल जाए बस।

करीमनः गइया बेच दिए ? किसे दिए ? अब तो उहो बुढा चली थी, दूध भी नहीं रहा होगा।

तिवारीः एक बियान और चलता बाकी कल्लने बेचवाये।

मौलवी साहबः राम राम, कसाई के हाथ बेचवा दिए ? धरम का नाश हो।

तिवारीः नहीं जनाब, कल्लन एक गाहक लियाए रहे। बड़ा टीका चन्नन मारे हुए एक ठाकुर रहा, कौनो गौशाला चलाते हैं। शहर के दक्खिन तरफ.स्कार्पियो से आया रहा और गऊ भी अपने लोडर में ले गया।

बुल्लूः हम समझ गवा, नरक में जइहो पंडीजी। ऊ बहुत हरामी जीव है। नेता है। उसका नाम तो कई साल पहले गऊ तस्करी में आया था, लेकिन नखलऊ तक पकड़ है। ओका कुछ न हुआ। मनीजर धरा गया जे कुछ दिन बाद बाहर आकर फिर लग गवा।

तिवारीः छोड़ यार, सरग-नरक सब इहें है। दुई बहुरिया फिर भी रोटी अइसे देती हैं, जइसे एहसान करती हैं। लात मार के हम निकाल दें तो सड़क पर आ जायेंगे उनके भतार लोग।

मौलवी साहबः ई तो कहानी घर-घर का है, बाकी तोरा नरक तो पक्का ओही दिन हो गया रहा, जब लखनऊ में कबाब खाए रहे। जब बिधायक जी के इहाँ गए रहे बिटिया के शिक्षा मित्र वाला केस में।

तिवारीः का बात करते हैं? अब बकरा तो हम लोगों में भी तमाम लोग घर में बना रहे हैं, हम तो फिर भी बाहर खाते हैं।

मौलवी साहबः अरे पंडीजी आप तीनों लोग टुंडे के यहाँ ही गए रहे न ? छोटक के मोबाइल पर देखा रहा था की ओकरी दुकान बंद हो गयी काहें से की बड़े का गोश्त का सप्लाई रुक गया। साला लखनऊ में भी एक्को लाइसेंस नहीं है बड़े को काटने का। बहुत सही किया जोगी ने। साले घूसखोरी से हराम का धंधा कर रहे थे और पूरी बिरादरी को खराब कर रहे थे।

तिवारीः अइसा नहीं हो सकता। उहाँ मटन कबाब लिखा था, बाकी हमको त मजा नहीं आया, बड़ा नाम सुना था कबाब- कबाब। सोचा देखें का होता है। अरे जब तक दांत लगा कर बोटी न खींचो तब तक गोश्त का मजा क्या ?

करीमनः हाँ चचा, थरिया में नल्ली ठोंक के खींचो तो अउर मजा देता है। एक बात है अपने कल्लन जइसा माल कोई नहीं देता है। शहर में एक बार खाए रहे, लगा सरवा बुढ़िया बकरी खिलाय दिया। एकदम चमड़ा जइसा।

बुल्लूः अभी साधु की चाय पकी नहीं और आप लोग सबेरे सबेरे पपीता से नल्ली तक निपटाय दिए जा रहे हो ? तेवारी चचा आपके बड़के जने मोटरसाईकिल लेकर निकले सबेरे ही, शहर गए का ?

तिवारीः न ना। ओकरे बेटा का आज गणित का बोर्ड है न। बात त सब पहिले से ही सेट है, लेकिन सरकार बदल जाने से थोड़ा अभी डर है, लेकिन मास्टर बोले हैं की कोई घबराने की बात नहीं है। अगर नंबर सही नहीं आएगा तो पइसा वापस कर देंगे। बाकी गणित में कवनो कहानी लिखना तो पड़ता है नहीं, आज प्रशासन कुछ टाईट रहेगा बाकी आधा घंटा भी मिल जायेगा तो फस्ट क्लास के नजदीक तक टेका देंगे।

मौलवी साहबः अच्छा मास्टर है न तो इतने ईमानदार लोग आज कम मिलते हैं, मदरसा बोर्ड में तो बहुत धांधली है। देखते हैं सरकार उसमें क्या कर पाती है। हाँ, तो चाट लिए तो अखबार देना यार, का-का पढ़े ? जोगी और नया क्या घोषणा किये ?

करीमनः उनके कुत्ते का नाम कल्लू है। फोटो भी छपा है। उनके तालाब में बक्खत भी बहुत हैं, जो रोज सबेरे उनका इन्तजार करती हैं। बाकी कवनो सिनेमा का भी खबर है। बड़ा मस्त नाम है, अनारकली आरा वाली। उसका एक डाइलाग भी छपा है – कड़ाही आप की, तेल आपका. अब चाहे पूड़ी छानिये या …..

तिवारीः चुप चुप। सबेरे सबेरे सिनेमा का नाम न लो। समाज भ्रष्ट कर दिया सबने। अबे देख त ऊ बस से कौन लौंडा उतर रहा है बैग लटकाए सबेरे-सबेरे ?

बुल्लूः ई तो जगेसर सिंह का नाती है, का हुआ बच्चा ? अभी होली बादे तो गए थे, छुट्टी हो गयी का ?

बच्चाः नहीं चचा पुलिस वाले पीट दिए। हम गाइड खरीदे के निकल रहे थे दुकान से, तब तक पुलिस वाली आय गइन सब। सामने लड़कियन का इस्कूल रहा। सिपाहिन हमसे बोलिन की साले इहाँ लवंडियाबाजी कर रहे हो। हम हाथ जोड़ कर कहते रह गए की गाइड खरीदने आये हैं तो बोलिन की झूठ बोलता है और चूतड़ पर दुई डंडा धर दिहिन। एक सिपाहिन तमाचा भी मारिन की किताब से नहीं पढ़ता है, गाइड से पढ़ेगा तो क्या समझ आएगा। भीड़ में बड़ा बेज्जती किया सब हमारा। जब की आप लोग सब जानते हो, बिद्या कसम हम आज तक जे लवंडियाबाजी किये हों।

तिवारीः कोई बात नहीं बेटा। ई सब से घबराना नहीं चाहिए। सिस्टम होता है। घर जाओ, आराम करो और दुई चार दिन बाद चले जाना फिर खूब मन लगा कर पढ़ना। दरोगा बन जाना तब भी ऊ सब सिपाही ही रहेंगी, तुमको सलाम ठोंकेगी। निकलो जल्दी।

करीमनः सही कर रही है पुलिस। कुछ बेक़सूर पिटायेंगे जरूर लेकिन शोहदे सुधर जायेंगे, नरक कर दिए हैं साले आजकल के लौंडे। अरे चाय छान लिए साधु तो बढ़ाओ, झूठे दाढ़ी बढ़ा के, कंठी माला लटका के चाय छानते हो। अब लड़ो परधानी। आखिर तुम भी त अजुधिया गए रहे मंदील बनवाने। अखबार में लिखा है की जोगी जी दर्शन करने जाने वाले हैं। चलो हम लोग भी प्रोगिराम बनावा जाय। मोलवी साहब आप भी चलिएगा, लेकिन ई समझ में नहीं आया की दलिया नमकीन खाते हैं की दूध वाला। एक दो दिन में कोई इसका भी खुलासा कर ही देगा सब बाकी एक बात साफ़ है की वो भी आम इंसानों जैसे ही हैं। हाँ, जोगी लोग तो वैसे भी कम ही सोते हैं। अखबार में लिखा है की साढ़े तीन बजे भोर में उठ जाते हैं।

मौलवी साहबः अखबार वालन को आकर इहाँ चाय के ठीहे पर भी देखना चाहिए। साधु रात में केतना बजे साफ़ सफाई करके निकलते हैं और भोर में कब आकर कोयला सुलगा देते हैं? दिल्ली से देखने पर सब नया नया ही लगता है। बाकी चापलूसी भी एक चीज होता है। अइसा नहीं है की जोगी समझ नहीं रहे होंगे। अब भर-भर पन्ना विज्ञापन भी तो चाहिए। अखिलेश नवा नवा बने थे तो कइसे कितना दिन तक कहाँ-कहाँ पढ़े, तो बच्चा कितने हैं, त बीवी कौन है, सब बता रहे थे। हाँ, पब्लिक को भी जानने का हक़ होता है और जानकर ख़ुशी हुआ की जोगी जी पपीता भी खाते हैं। हकीम साहब भी कहते थे की मिले त रोज खाना चाहिए।

It's only fair to share...Email this to someoneShare on FacebookShare on Google+Tweet about this on TwitterShare on LinkedIn

Facebook Comments